बजट घोषणा 2026-27 के तहत धौलपुर जिले में 122.35 किमी नॉन-पेचेबल-मिसिंग लिंक सड़कों का होगा निर्माण

बजट घोषणा 2026-27 के तहत धौलपुर जिले में 122.35 किमी नॉन-पेचेबल-मिसिंग लिंक सड़कों का होगा निर्माण

बजट घोषणा 2026-27 के तहत धौलपुर जिले में 122.35 किमी नॉन-पेचेबल-मिसिंग लिंक सड़कों का होगा निर्माण,39.52 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत, ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन होगा सुगम

बजट घोषणा वर्ष 2026-27 के तहत जिले में नॉन-पेचेबल-मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण को लेकर महत्वपूर्ण स्वीकृति जारी की गई है। अधीक्षण अभियंता साार्वजनिक निर्माण विभाग मधुसूदन राव ने बताया कि जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कुल 122.35 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के निर्माण के लिए 39.52 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन सड़कों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होने के साथ-साथ गांवों को मुख्य मार्गों एवं अन्य प्रमुख क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

*विधानसभा क्षेत्र धौलपुर*

उन्होंने बताया कि विधानसभा क्षेत्र धौलपुर के अंतर्गत 28.05 किलोमीटर लंबाई की नॉन-पेचेबल, मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण के लिए 9.81 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। इन कार्यों के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।

*विधानसभा क्षेत्र बाड़ी*

विधानसभा क्षेत्र बाड़ी के अंतर्गत 33.65 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के निर्माण के लिए 9.87 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इनमें से 13.70 किलोमीटर लंबाई के सड़क निर्माण कार्यों के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।

*विधानसभा क्षेत्र बसेड़ी*

विधानसभा क्षेत्र बसेड़ी के अंतर्गत 28.60 किलोमीटर लंबाई की नॉन-पेचेबल, मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण के लिए 9.98 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई है। इन कार्यों के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।

*विधानसभा क्षेत्र राजाखेड़ा*

विधानसभा क्षेत्र राजाखेड़ा के अंतर्गत 32.05 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के निर्माण के लिए 9.86 करोड़ रुपये’ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इन कार्यों के भी ’कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।

*सड़क कनेक्टिविटी को मिलेगा विस्तार*

उन्होंने बताया कि नॉन-पेचेबल एवं मिसिंग लिंक सड़कों के निर्माण से जिले के ऐसे क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होगा, जहां वर्तमान में आवागमन की सुविधा सीमित है। सड़क निर्माण से ग्रामीण आबादी को आवागमन में सुविधा, कृषि उपज के परिवहन में सहूलियत तथा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी।