RIFF और BIFFES 2026 में महिला-केंद्रित सिनेमा की आवाज़ बनीं इति आचार्य
अभिनेत्री-निर्माता इति आचार्य ने RIFF में महिला सिनेमा पर चर्चा की, BIFFES में फ़िल्म 4by4 को मिला सम्मान।
अभिनेत्री और निर्माता इति आचार्य भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा में एक सशक्त और प्रभावशाली आवाज़ के रूप में उभर रही हैं। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली और वर्तमान में बेंगलुरु में सक्रिय इति, उन नई पीढ़ी की कलाकारों में शामिल हैं जो भौगोलिक और भाषाई सीमाओं को तोड़ते हुए महिला-केंद्रित कहानियों को मुख्यधारा में ला रही हैं।
हाल ही में इति आचार्य को राजस्थान इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल (RIFF) 2026, जोधपुर में आयोजित Women of Cinema पैनल चर्चा में आमंत्रित किया गया। इस चर्चा में भारतीय सिनेमा में महिलाओं की बदलती भूमिका—कैमरे के सामने और पीछे—पर गहन संवाद हुआ। पैनल में इति के साथ अभिनेत्री अदिति पोहनकर, वरिष्ठ लेखिका-अभिनेत्री सीमा कपूर और थिएटर व फ़िल्म की चर्चित हस्ती जयति भाटिया जैसी नामचीन शख्सियतें शामिल रहीं।
RIFF में यह उपस्थिति इति के लिए विशेष रही, क्योंकि इससे पहले उनकी कन्नड़ फ़िल्म “4by4” को बैंगलोर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल (BIFFES) 2026 में स्पेशल जूरी मेंशन से सम्मानित किया गया। यह सम्मान फ़िल्म को BIFFES में प्रदर्शित प्रमुख महिला-नेतृत्व वाली फिल्मों की सूची में शामिल करता है और यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय सिनेमा में सार्थक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक कहानियों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
पैनल चर्चा के दौरान इति आचार्य ने राजस्थान से बेंगलुरु तक के अपने सफर को साझा किया। उन्होंने बताया कि कम उम्र में एक नई भाषा, संस्कृति और फ़िल्म इंडस्ट्री में खुद को स्थापित करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन कन्नड़ फ़िल्म उद्योग और दर्शकों ने उन्हें खुले दिल से अपनाया। इति ने कन्नड़ सिनेमा को अपने विकास और पहचान का एक महत्वपूर्ण आधार बताया।
RIFF 2026 में इति आचार्य को प्रख्यात अभिनेता, निर्देशक और निर्माता मकरंद देशपांडे द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा, ‘धुरंधर’ फेम गायक शहज़ाद अली, अभिनेता अनूप सोनी, कवि और टेलीविजन व्यक्तित्व शैलेश लोढ़ा, सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फ़िल्ममेकर मौजूद रहे।
अपनी फ़िल्म 4by4 के बारे में बात करते हुए इति ने बताया कि यह कहानी चार अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाली महिलाओं के जीवन और संघर्षों पर आधारित है। यह फ़िल्म न केवल कथानक में बल्कि दृष्टिकोण में भी पूरी तरह महिला-नेतृत्व वाली है, जो भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।
इति आचार्य के शब्दों में,
“महिलाओं के संघर्ष समय के साथ बदलते हैं और सिनेमा को उन बदलावों को प्रतिबिंबित करना चाहिए। फ़िल्में समाज में जागरूकता फैलाने और संवाद शुरू करने की शक्ति रखती हैं।”
RIFF और BIFFES जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर इति आचार्य की सक्रिय भागीदारी यह स्पष्ट करती है कि भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा में महिला-केंद्रित और संवेदनशील कहानियाँ अब केंद्र में आ रही हैं।