एक सपना बना सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षकों की मुस्कान

एक सपना बना सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षकों की मुस्कान

25 वर्षों बाद के. डी. जैन विद्यालय परिवार का ऐतिहासिक मिलन, 100 से अधिक पूर्व विद्यार्थी और 15 से अधिक शिक्षक हुए शामिल

वर्षों से संजोया सपना हुआ साकार, भावनाओं, सम्मान, यादों और अपनत्व से सराबोर रहा K. D. Jain Reunion 2026

किशनगढ़। कभी एक छात्र द्वारा देखा गया सपना 14 जून 2026 को सैकड़ों विद्यार्थियों और शिक्षकों की मुस्कान बनकर साकार हुआ। के. डी. जैन विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों और शिक्षकों का 25 वर्षों बाद आयोजित हुआ भव्य पुनर्मिलन समारोह K. D. Jain Reunion 2026 न केवल सफल रहा, बल्कि किशनगढ़ के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया।

इस आयोजन की परिकल्पना विद्यालय के पूर्व छात्र एवं जयपुर निवासी के.के. सालवी ने वर्षों पूर्व की थी। उनका सपना था कि विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी और शिक्षक एक बार फिर उसी परिसर में एकत्रित हों, जहां से उनकी जीवन यात्रा की शुरुआत हुई थी। लगभग सात-आठ वर्ष पूर्व भी उन्होंने इस दिशा में प्रयास किया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। इस बार उन्होंने दृढ़ संकल्प लिया कि यह आयोजन हर हाल में होगा।

सबसे पहले उन्होंने बबलू जी से संपर्क किया। इसके बाद अखिल अग्रवाल एवं दीपक मोदानी के साथ विचार-विमर्श कर आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई। सभी ने इस विचार का स्वागत किया और एक मजबूत कोर टीम का गठन किया गया।

कोर टीम में अजय गंगवाल, समकित पहाड़िया, मनीष राठी, रोहित ओसवाल, प्रदीप शर्मा, अंकुश अरोड़ा, आशीष काबरा, हिमांशु गोधा, सुमित अग्रवाल, विवेक दरगड़, योगेश भूतड़ा, ललित कामदार एवं गिरीश कुमावत सहित अनेक साथियों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। सभी सदस्यों ने पिछले 15 दिनों तक दिन-रात अथक परिश्रम करते हुए पूर्व विद्यार्थियों से संपर्क स्थापित किया, कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की तथा आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य किया।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप लगभग 150 पूर्व विद्यार्थियों को एक मंच पर जोड़ा गया। विशेष बात यह रही कि किशनगढ़, जयपुर और राजस्थान के विभिन्न शहरों के अलावा देश और विदेश में बसे अनेक पूर्व विद्यार्थी भी इस आयोजन से जुड़े।

आयोजन की तैयारियों के दौरान विद्यालय के सम्मानित शिक्षकों को भी आमंत्रित किया गया। दीपक कुमावत सर, दिनेश विजयवर्गीय सर, जी. के. वार्ष्णेय सर, महावीर प्रसाद अजमेरा सर, एम.पी. वासनी सर, पवन कुमार जैन सर, शिवजीराम जी, किशनलाल तंवर साहब, गुलाब चंद शर्मा सर, मंजू दायमा मैडम, मंजू रानी जैन मैडम, सुशीला गोयल मैडम, रामकिशन सैनी जी, विभा मिश्रा मैडम तथा शारदा सैनी मैडम सहित अनेक शिक्षकों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके साथ ही विद्यालय के पूर्व कर्मचारी तेजी जी की उपस्थिति ने भी सभी पुरानी यादों को ताजा कर दिया।

14 जून को आयोजित इस भव्य समारोह की शुरुआत ढोल-नगाड़ों और उत्साहपूर्ण रैली के साथ हुई। वर्षों बाद जब पूर्व विद्यार्थी अपने पुराने विद्यालय परिसर में प्रवेश कर रहे थे, तब उनके चेहरे पर उत्साह, गर्व और भावनाओं का अनूठा संगम दिखाई दे रहा था।

विद्यालय की पुरानी कक्षाओं में पुनः वही वातावरण बनाया गया, जिसने सभी को अपने छात्र जीवन की यादों में पहुंचा दिया। इस अवसर पर दीपक कुमावत सर ने विद्यार्थियों की उपस्थिति लेकर पुराने दिनों को जीवंत कर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र बताए तथा प्रेरणादायक संदेश दिए। विद्यार्थियों ने उनका पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया, चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा उनके साथ यादगार तस्वीरें खिंचवाईं। यह दृश्य सभी के लिए अत्यंत भावुक और अविस्मरणीय रहा।

इसके बाद विद्यार्थियों ने अपने पुराने मित्रों के साथ समय बिताया, विद्यालय परिसर का भ्रमण किया तथा वर्षों पुरानी यादों को ताजा किया। दिनभर का माहौल उत्साह, अपनत्व और भावनाओं से भरपूर रहा।

शाम को आयोजित मुख्य समारोह में सभी पूर्व विद्यार्थियों का परिचय सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने अपने जीवन की यात्रा, उपलब्धियों और वर्तमान कार्यक्षेत्र के बारे में जानकारी साझा की। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

कोर टीम द्वारा सभी शिक्षकों का पुष्पगुच्छ, माला, स्मृति चिन्ह एवं उपहार देकर सम्मान किया गया। इसके बाद सभी शिक्षकों को मंचासीन कर उनका विशेष अभिनंदन किया गया। शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यालय के स्वर्णिम दिनों की यादें ताजा कीं। उनके संस्मरणों ने पूरे वातावरण को भावुक बना दिया।

वर्षों बाद गुरु और शिष्यों के बीच दिखाई दिया प्रेम, सम्मान और आत्मीयता कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। कई विद्यार्थियों और शिक्षकों की आंखें नम हो गईं और पूरा सभागार भावनाओं से भर उठा।

कार्यक्रम के दौरान सभी विद्यार्थियों को भी सम्मान स्वरूप दुपट्टा एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। इसके पश्चात सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों का स्नेहपूर्वक स्वागत एवं आतिथ्य किया।

रात्रिकालीन सत्र में रैम्प वॉक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, मनोरंजक खेल, अभिनय, संगीत और नृत्य कार्यक्रमों ने सभी का भरपूर मनोरंजन किया। पुराने मित्रों के साथ तस्वीरें, सेल्फी और यादों का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब विद्यार्थियों और कोर टीम के सदस्यों ने अपनी स्मृति स्वरूप टी-शर्ट पर एक-दूसरे के हस्ताक्षर लिए। यह दृश्य मित्रता, अपनत्व और वर्षों पुराने संबंधों की गहराई का प्रतीक बन गया।

पूरे कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं शानदार मंच संचालन समकित पहाड़िया एवं के.के. सालवी द्वारा किया गया। दोनों ने अपने सहज, आत्मीय और ऊर्जावान संचालन से कार्यक्रम को निरंतर रोचक बनाए रखा तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों को पूरे आयोजन से भावनात्मक रूप से जोड़े रखा। उनके उत्कृष्ट मंच संचालन ने कार्यक्रम की गरिमा और भव्यता को और अधिक बढ़ा दिया।

अंत में आयोजन समिति द्वारा सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, सहयोगियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि यह केवल एक रीयूनियन नहीं था, बल्कि जीवन के सबसे खूबसूरत पलों को पुनः जीने का अवसर था।

उल्लेखनीय है कि किशनगढ़ के इतिहास में विद्यालय स्तर पर इस प्रकार का इतना विशाल, सुव्यवस्थित और भव्य पुनर्मिलन समारोह पहली बार आयोजित हुआ, जिसमें 100 से अधिक पूर्व विद्यार्थी तथा 15 से अधिक शिक्षक शामिल हुए। K. D. Jain Reunion 2026 ने यह सिद्ध कर दिया कि समय चाहे कितना भी बीत जाए, विद्यालय की यादें, गुरुजनों का आशीर्वाद और मित्रों का साथ कभी पुराना नहीं होता।